दिल्ली विधानसभा पर निर्माण मज़दूरों का विशाल प्रदर्शन
28 मार्च 2016 (सोमवार) प्रात: 10 बजे नमा (निर्माण मजदूर अधिकार अभियान) के द्वारा अमजद हसन के नेतृत्व में चन्दगीराम अखाडा से चलता हुआ सिविल लाइंस विधान सभा तक निर्माण मज़दूरों ने अपनी मांगो को लेकर एक विशाल प्रदर्शन किया, इस प्रदर्शन में 25 से अधिक संगठनों ने तथा 10000 निर्माण मज़दूरों ने हिस्सा लिया इस विशाल प्रदर्शन के परिणामस्वरुप, ये हुआ कि वर्तमान सरकार में खलबली मच गई, तत्पश्चात सरकार के प्रतिनिधियों ने संगठनो के साथियो के साथ बातचीत का आश्वासन दिया...!!!
इससे पूर्व भी नमा (निर्माण मजदूर अधिकार अभियान) निर्माण श्रमिकों की समस्याओं को लेकर कई बार सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने का प्रयास करती रही कई पत्र ज्ञापन सौंपे किन्तु किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी, तब नमा (निर्माण मजदूर अधिकार अभियान) ने यह निर्णय लिया कि निर्माण श्रमिकों के हितों के लिए उन्हें संगठित रूप से सामने आना होगा | इसलिए इस प्रदर्शन का आहवान किया गया जिसमे सभी निर्माण श्रमिकों ने व् निर्माण श्रमिक संगठनों ने जोश के साथ हिस्सा लिया ये प्रदर्शन श्री अमजद हसन के नेतृत्व में हुआ इस प्रदर्शन में 25 से अधिक संगठनों ने हिस्सा लिया और 10000 से अधिक निर्माण श्रमिक इसमें सम्मिलित हुए ये प्रदर्शन चन्दगीराम अखाड़े से चलता हुआ सिविल लाइंस विधान सभा तक पहुंचा... इस बीच श्री अमजद हसन ने निर्माण श्रमिको और संगठनों को संबोधित भी किया उन्होंने निर्माण श्रमिकों की 13 मांगों को भी दोहराया जिनमे निर्माण श्रमिकों के लिए अलग न्यूनतम वेतन भी है व् निर्माण श्रमिकों का फंड सिर्फ निर्माण श्रमिकों के लिए ही खर्च हो यह भी |
इसका निष्कर्ष तो ये निकलता है कि धरना प्रदर्शन करने वाली सरकार को केवल धरना प्रदर्शन की ही भाषा समझ में आती है, पिछले एक वर्ष से सत्ता में आई हुयी सरकार ने संगठनों को समय देना उचित ही नहीं समझा था।
चलो देर आए, दुरुस्त आये..!
मज़दूरों की एकता . . . . . . . .ज़िंदाबाद . . .ज़िंदाबाद
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इससे पूर्व भी नमा (निर्माण मजदूर अधिकार अभियान) निर्माण श्रमिकों की समस्याओं को लेकर कई बार सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने का प्रयास करती रही कई पत्र ज्ञापन सौंपे किन्तु किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी, तब नमा (निर्माण मजदूर अधिकार अभियान) ने यह निर्णय लिया कि निर्माण श्रमिकों के हितों के लिए उन्हें संगठित रूप से सामने आना होगा | इसलिए इस प्रदर्शन का आहवान किया गया जिसमे सभी निर्माण श्रमिकों ने व् निर्माण श्रमिक संगठनों ने जोश के साथ हिस्सा लिया ये प्रदर्शन श्री अमजद हसन के नेतृत्व में हुआ इस प्रदर्शन में 25 से अधिक संगठनों ने हिस्सा लिया और 10000 से अधिक निर्माण श्रमिक इसमें सम्मिलित हुए ये प्रदर्शन चन्दगीराम अखाड़े से चलता हुआ सिविल लाइंस विधान सभा तक पहुंचा... इस बीच श्री अमजद हसन ने निर्माण श्रमिको और संगठनों को संबोधित भी किया उन्होंने निर्माण श्रमिकों की 13 मांगों को भी दोहराया जिनमे निर्माण श्रमिकों के लिए अलग न्यूनतम वेतन भी है व् निर्माण श्रमिकों का फंड सिर्फ निर्माण श्रमिकों के लिए ही खर्च हो यह भी |
इसका निष्कर्ष तो ये निकलता है कि धरना प्रदर्शन करने वाली सरकार को केवल धरना प्रदर्शन की ही भाषा समझ में आती है, पिछले एक वर्ष से सत्ता में आई हुयी सरकार ने संगठनों को समय देना उचित ही नहीं समझा था।
चलो देर आए, दुरुस्त आये..!
मज़दूरों की एकता . . . . . . . .ज़िंदाबाद . . .ज़िंदाबाद
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