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आम से ख़ास बने केजरीवाल जी ने सुनी निर्माण संगठनों की बात

नई दिल्ली 29 मार्च 2016 निर्माण श्रमिकों के विशाल प्रदर्शन के पश्चात सरकार ने श्रमिकों की तरफ से नमा (निर्माण मजदूर अधिकार अभियान) के एक प्रतिनिधि मंडल ने आज दिल्ली के आम से ख़ास बने मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल जी से उनके आवास स्थित कार्यालय में मुलाक़ात की |


सुबह सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री आवास पर सभी श्रमिक संगठन प्रतिनिधियों ने केजरीवाल जी से मुलाक़ात की और सबसे पहले नमा (निर्माण मजदूर अधिकार अभियान) की ओर से थानेश्वर दयाल आदिगौड़ जी ने श्रमिकों की मांगो को मुख्यंमंत्री जी के सामने रखा, तत्पश्चात अमजद हसन जी ने निर्माण श्रमिकों से सम्बंधित अन्य कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे निर्माण श्रमिकों का न्यूनतम वेतन में वृद्दि, श्रमिकों के हितलाभ में वृद्दि, निर्माण मजदूर कल्याण कोष का दुरुपयोग, सेस न जमा कराने वालो के खिलाफ कानूनी कार्यवाही, निर्माण श्रमिकों को ई.एस.आई.सी. से जोड़ने तथा बोर्ड के मेम्बरों का चयन की प्रक्रिया पर जो प्रश्नचिन्ह थे वो सभी केजरीवाल जी के सामने रखे | दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री केजरीवाल जी ने प्रारंभ में इस प्रतिनिधिमंडल को ये कह के टालना चाहा कि हाँ ये मैं करूँगा, देखूंगा लेकिन थानेश्वर दयाल आदिगौड व् अमजद हसन जी ने अपनी बात को स्प्ष्ट रूप से केजरीवाल जी को समझाया कि ये एक संवेदनशील मुद्दा है, ये सभी बिंदु श्रमिकों से जुड़े हुए है व् निर्माण श्रमिको की उपेक्षा दिल्ली सरकार में हो रही है उनको उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा है बोर्ड में स्टाफ की कमी के कारण श्रमिकों को श्रम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते है| तब दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री केजरीवाल जी ने इन मुद्दों को चाहे गंभीरता से न लिया हो पर इस प्रतिनिधिमंडल को गंभीरता से लिया और कहा की हम निर्माण श्रमिकों के लिए निश्चित रूप से कार्य करेंगे और उन्होंने अपनी इस भूल को भी स्वीकार किया कि चुनाव से पहले के श्रम सम्बन्धी मुद्दे मुख्य थे वो गौड़ हो गए हैं, केजरीवाल जी ने कहा कि वे दिल्ली भवन एवं संनिर्माण कल्याण बोर्ड और श्रम विभाग दोनों ही विभागों में स्टाफ की कमी की समस्या को व् पूर्ण श्रम विभाग को अगले माह से मैं स्वयं व्यक्तिगत रूप से देखूंगा | उन्होंने कहा की हम मानते है कि श्रमिकों की उपेक्षा हुई है श्रमिको को उनका हक़ नहीं मिल पा रहा है, उन्होंने माना कि दिल्ली में न्यूनतम वेतन बहुत कम है उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि “दिल्ली में आज मजदूर 9000 कमाता है इतने में आज दिल्ली में गुजारा नहीं चलता जी”


श्रमिक संगठन प्रतिनिधि अशरफ खान ने भी केजरीवाल जी को श्रम विभाग में कर्मचारियों और लेबर इंस्पेक्टरों की कमी के बारे में बताया उन्होंने बताया की श्रम विभाग में प्रस्तावित संख्या के एक तिहाई संख्या पर श्रम विभाग कार्य कर रहा हैं


ततपश्चात थानेश्वर दयाल आदिगौड ने एक अन्य मुद्दे पर भी उनका ध्यान केन्द्रित करवाया जिसमे उनको दिए जाने वाली शिकायते के वितरण के सम्बन्ध में था थानेश्वर दयाल आदिगौड ने उन्हें बतलाया की उन्हें मिलने वाले शिकायते ही नहीं उन्हें दिए जाने वाली बधाईया और प्रशंसात्मक पत्र भी पब्लिक ग्रीवांस में भेज दी जाती है | थानेश्वर दयाल आदिगौड जी ने बताया की अगर हम आपको उनके किये किसी श्रम सम्बन्धी कार्य की बधाई पत्र दिल्ली सचिवालय भेजते है तो वहां का स्टाफ उसे ग्रीवांस बना कर श्रम विभाग प्रेषित कर देता है इस मुद्दे को केजरीवाल जी ने बहुत गंभीरता से लिया और अपने स्टाफ से बात कर उन्होंने सम्बंधित स्टाफ को तुरंत निलंबित करने के लिए कहा |


इसके साथ ही दानमु अध्यक्ष श्री अमजद हसन जी ने मुख्यमंत्री जी को एक अन्य सुझाव दिया की आप कई तरह के विंग दिल्ली में बना रहे है युवा दल, नारी सुरक्षा दल, व् अन्य इसी क्रम में उन्होंने सुझाव दिया की आप एक लेबर दल भी बनाए जो लेबर सम्बन्धी समस्या पर त्वरित कार्य करे तथा उनकी समस्याओं का निपटान तुरंत हो सके|


इस सुझाव को भी केजरीवाल जी ने गंभीरता से लिया तत्पश्चात नमा (निर्माण मजदूर अधिकार अभियान) की दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ यह मीटिंग समाप्त हुई


वस्तुतः विगत पिछले कुछ समय से केजरीवाल सरकार यूनियन के प्रतिनिधियों से मिलने से कतराती रही है क्योंकि वे उस प्रक्रिया को नहीं मानना चाहते जिससे वो खुद इस सत्ता में आये है उनके अनुसार वे श्रमिक नेता लोगो ने नहीं मिलना चाहते वे कहते है कि आप नेतागिरी कर रहे है जिस जनता संवाद की सरकार का सपना उन्होंने दिखाया था वो सभी सपने अब चूर चूर हो चुके है |


आम आदमी पार्टी ने स्वयं कितने ही धरने और प्रदर्शन किये जिसमे जनता ने उनका साथ दिया पर आज जनता जिन लोगो के साथ है जिन्हें अपना प्रतिनिधि मान रही है उन्हें वो मिलने से मना करते है 28 मार्च के विशाल प्रदर्शन में 10000  से अधिक श्रमिकों ने भाग लिया था अगर ये सभी आपकी श्रम सम्बन्धी नीतियों से संतुष्ट होते तो क्या इतनी जनता इस प्रदर्शन में भाग लेती अब ये जनता और जो लोग उनके हक़ की आवाज उठा रहे है ये लोग इन्हें अस्वीकार है ये दोहरा बर्ताव क्यों मुख्यमंत्री जी | उनका कहना है कि वे स्वयं जनता से संवाद कर लेंगे उनकी समस्याओं को हल कर देंगे, मुख्यमंत्री जी गरीब मजदूर गरीब जनता अपना प्रतिनिधि ही चुन कर बात करती है आपने स्वयं भी यही किया था | सुबह ७ बजे निकल कर रात ९ बजे आने वाला मजदूर अपनी बात कहाँ से कहेगा, क्यों आप की सरकार श्रमिकों के मुद्दे से कतराती है इन्हें दबाना चाहती है |


आज भी दिल्ली में श्रमिको को न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा है | निर्माण श्रमिकों के लिए जो फंड है उसका दुरुपयोग हो रहा है | श्रमिकों को अपनी दिहाड़ी छोड़ कर श्रम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे है | आपकी सरकार आने के बाद कॉन्ट्रैक्ट लेबर और बढ़ी न कि कम हुई | निर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षा के कोई कड़े नियम आपकी सरकार आने के बाद नहीं बने एम्स दुर्घंटना इसका उदाहरण है, मुख्यमंत्री जी हादसे आपकी सरकार में भी निरंतर हो रहे है | श्रम मंत्री जी “आओ बस करे” में व्यस्त है और यहाँ श्रमिकों को खाने को रोटी नहीं मिल रही है ये बात आपने खुद मानी, तो आपने किया क्या? जब ये बात आपकी जानकारी में है कि दिल्ली में श्रमिकों का शोषण हो रहा है तो इस बाबत आपने क्या कदम उठाये | आप स्वयं को आम आदमी कहते है आम आदमी की समस्या से आप वाकिफ न हो ये कैसे हो रहा है? आप की सरकार में श्रमिको को उनका हक़ क्यों नहीं मिल रहा? क्यों नहीं श्रम कानून प्रभावी हो रहे है? इन्ही सब बातों का दिल्ली की जनता आपसे जवाब चाहती है |

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