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निर्माण मज़दूर अधिकार अभियान की ओर से माननीय उप राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन के सन्दर्भ में बोर्ड का जवाबी पत्र

निर्माण मज़दूर अधिकार अभियान की ओर से माननीय उप राज्यपाल को ज्ञापन दिया गया था जिसमे दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की २ जून, 2016 को हुई 29 वीं बैठक में लिए गए निर्णयों को निरस्त/ रद्द करवाने की मांग की गई थी उस ज्ञापन के सन्दर्भ में बोर्ड ने प्रत्युतर पत्र :

 

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निर्माण मज़दूर अधिकार अभियान की ओर से माननीय उप राज्यपाल को ज्ञापन दिया गया था जिसमे दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की २ जून, 2016 को हुई 29 वीं बैठक में लिए गए निर्णयों को निरस्त/ रद्द करवाने की मांग की गई थी उस ज्ञापन के सन्दर्भ में बोर्ड ने प्रत्युतर पत्र प्रेषित किया है, ज्ञापन में निम्न मांगे की गई थी :

 

हम आपका ध्यान दिल्ली में निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए गठित दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण कल्याण बोर्ड (श्रम विभाग - दिल्ली सरकार) की दिनांक २ जून, 2016 को हुई 29वीं बैठक, जो की श्रम मंत्री एवं बोर्ड के चेयरमैन श्री गोपाल राय की अनुपस्थिति में श्री सत्येन्द्र जैन (स्वास्थ्य मंत्री) की अध्यक्षता में हुई, उस बैठक में लिए गए नियमों के विरूद्व, राजनीति से प्रेरित अनूचित निर्णयों की और दिलाना चाहते है ।
श्रीमान दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की आपातकालीन बैठक के नाम से 30.06.2016 को प्रेषित नोटिस में वितरित किये गए एजेंडा पेपर एवं 2 जून, 2016 को सत्येन्द्र जैन (स्वास्थ्य मंत्री - दिल्ली सरकार) के निवास पर हुई इस बैठक में बोर्ड के फंड से स्कूल निर्माण के लिए 100 करोड़ रूपये, अस्पताल बनाने के लिए 200 करोड़ रूपये, आंगनवाडी खोलने के लिए 400 करोड़ रूपये एवं मजदूरों को साइकिल प्रदान करने हेतु 50 करोड़ रूपये का आवंटन करने का निर्णय लिया गया, जो की पूर्णतः अनुचित, असंगत, नियम के विरुद्ध एवं मजदूर विरोधी है एवं पूर्ण रूप से राजनीती से प्रेरित हैं। बोर्ड द्वारा इस बैठक में कुल 950 करोड़ रूपये बोर्ड के सेस फंड से शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण एवं समाज कल्याण विभाग को हस्तांतरण करने का निर्णय सर्वथा गलत एवं निर्माण मजदूरों के लिए बने केंद्रीय कानूनों एवं दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण कल्याण बोर्ड अधिनियम के नियमो के विरुद्ध लिया गया है ।
इसी क्रम में इस बैठक में बोर्ड द्वारा पंजीकृत निर्माण मजदूरों को प्रदान की जा रही 3000 रूपये की मासिक पेंशन को घटाकर समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रदान की जा रही पेंशन (1000/- रूपये मासिक) के बराबर करना एवं दिल्ली के विधायकों को बोर्ड में निर्माण मजदूरों के पंजीकरण करने का अधिकार दिए जाने जैसे फैसले भी पूर्णतः अनुचित, असंगत एवं मजदूर विरोधी है।
इस सन्दर्भ में हम निम्नलिखित तथ्यों की ओर आपका ध्यानाकर्षित कराना चाहते है:-
1- दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण कल्याण बोर्ड एक स्वायत्तशासी संस्था हैं जिसका गठन क्ठव्ब्ॅ त्न्स्म्ै 2002 की धारा 251 के अनुसार दिल्ली के उपराज्यपाल के द्वारा किया गया है।
2. बोर्ड का संचालन सेस फंड से किया जाता है। दिल्ली सरकार का बजट एवं फंड और बोर्ड का फंड दोनों अलग अलग है ।
3. बोर्ड द्वारा लागू सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल बोर्ड में पंजीकृत मजदूर एवं उनके परिवारों के लिए है गैर निर्माण मजदूरों पर बोर्ड का फंड खर्च नहीं किया जा सकता । वर्तमान में बोर्ड द्वारा 18 कल्याणकारी योजनायें (दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण कल्याण बोर्ड, 2002 की धारा 271 से लेकर 283 तक ) चलाई जा रही है । जिनका सीधा लाभ दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण कल्याण बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मिल रहा है ।
4- बोर्ड का फंड केवल निर्माण श्रमिकों के कल्याण से संबंधित योजनाओं पर खर्च करनें एवं बोर्ड के प्रशासनिक खर्च (5ः तक ) के लिए हैं । किसी भी प्रकार के ढांचागत निर्माण परियोजनाओं पर खर्च के लिऐ नहीं है जैसा की श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार, के आदेश संख्या्र-20011/08/2014-ठस् दिनांक 7 जून 2016 में स्पष्ट उल्लेखित किया गया है ।
5- बोर्ड के लगभग 2000 करोड़ रूपये निर्माण श्रमिकों के फंड से आपातकालीन बैठक बूला कर, एक मुश्त, एक झटके में 950 करोड़ रूपये दुसरे विभागों (शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण एवं समाज कल्याण) को स्थानांतरित करना गलत एवं नियमों के विरुद्ध है ।
6- दिल्ली को शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं समाज कल्याण विभाग का अलग से सरकारी बजट फंड निर्धारित होता है इसके बाद बोर्ड का फंड इन विभागों को देने का कोई औचित्य नहीं बनता ।
7- बोर्ड की 29वीं बैठक में लिए गए निर्णयों से तो यही लगता है, कि दिल्ली सरकार बोर्ड के गठन के उद्देश्यों को ताक पर रखकर इसे अपनी पार्टी के बखान के लिए प्रयोग करना चाहती है चाहे इस से बोर्ड पंगु हो जाए । ध्यातव्य हो कि ढांचागत परियोजनाओं पर अधिक खर्च भ्रस्ताचार की तरफ इशारा करता है ।
8- दिल्ली भवन एवं अन्य संनिर्माण कल्याण बोर्ड मंे पंजीकृत निर्माण श्रमिको को भविष्य में उनकी कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च होने वाली धनराशी के अनुमान लगाए बिना, इतनी बड़ी रकम का एक मुश्त खर्च करना कहाँ का औचित्य है।
9- यदि बोर्ड में सही प्रकार से कल्याणकारी योजनाओं पर राशि लगनी शुरू हो जाए तो वर्तमान से एकत्रित राशी भी बहुत कम पड़ेगी । आज भी बोर्ड के कार्यालय में सैंकड़ों निर्माण श्रमिक लाभार्थियों के आवेदन लंबित पड़े है । जरुरत उन पर तत्काल निर्णय लेकर उनके निपटारे की है ताकि अधिक से अधिक निर्माण श्रमिक बोर्ड से लाभान्वित हो सके ।
10- बोर्ड का फंड दिल्ली सरकार द्वारा राजनैतिक हित में खर्च करना सरासर गलत है एवं मजदूरों के हकों पर डाका डालने के समान है, जैसा कि पहले दिल्ली सरकार को इस तरह के क्रत्र्य के लिये माननीय उच्चतम न्यायालय 21-08-2015 के आदेशानुसार फटकार भी पड़ चुकी है कि उन्होंने बोर्ड की राशि को प्रचार प्रसार में खर्च किया जो कि नियम के विरूद्व है, जिसे अब दिल्ली सरकार को वापस बोर्ड में जमा करना होगा ।

अतः आपसे अनुरोध है, कि उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आप बोर्ड की 29वीं बैठक में लिए गए निर्णयों / फैसलों को तुरंत निरस्त करे एवं दिल्ली के लाखों निर्माण श्रमिकों के अधिकारों के सरंक्षण को सुनिश्चित करें ।

धन्यवाद सहित
भवदीय

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